notebook सजी है जहीर प्रनूतन के रोमांस से

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notebook प्रनूतन बहल-जहीर इकबाल की रोमांटिक केमिस्ट्री से सजी है. नोटबुक, डेब्यू फिल्म में छोड़ी एक्टिंग की छाप.

एंटरटेनमेंट डेस्क,लोक हस्तक्षेप

notebook एक टीचर कबीर (जहीर इकबाल) की कहानी है जो कश्मीर के हाउस-बोट स्कूल में पढ़ाने के लिए पहुंचता है.

यहां पर उसे पहले रही एक अन्य टीचर फिरदौस (प्रनूतन बहल) की एक notebook मिलती है.

नितिन कक्कड़ की इस फिल्म में एक्स आर्मी ऑफिसर कबीर (जहीर इकबाल), एक स्कूल में टीचर बनकर आते हैं,

जहां उन्हें पिछले साल की टीचर फिरदौस (प्रनूतन बहल) की एक डायरी मिलती है.

ये डायरी फिरदौस की पर्सनल डायरी होती है, जिसे पढ़कर कबीर को उससे प्यार हो जाता है.

जबकि कबीर ने फिरदौस को पहले कभी देखा भी नहीं होता है.

यह फिल्म पूरी तरह रोमांटिक फिल्मों के डाई-हार्ड फैन्स के लिए है,

फिर भी यह इस जॉनर की फिल्म के हिसाब से पूरी तरह अपने सब्जेक्ट के साथ न्याय नहीं कर पाती है.

notebook फिल्म का प्लॉट काफी दिलचस्प है लेकिन इसका स्क्रीनप्ले बेहद कमजोर है.

यह फिल्म साल 2014 में आई थाई फिल्म ‘द टीचर्स डायरी’ का अडैप्टेशन है.

फिल्म में जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल एक ताजी हवा के झौंके की तरह सामने आते हैं.

कश्मीर की शूटिंग फिल्म को और ज्यादा खूबसूरत बना देती है.

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बग़ैर किसी से मिले उसके प्यार में डूब जाना काफी दिलचस्प लगता है लेकिन इस स्टोरी लाइन को स्थापित करने में काफी वक्त लिया जाता है.

यह कपल फिल्म के अंत तक एक-दूसरे से नहीं मिल सकता है लेकिन जब यह हाई-ड्रामा शुरू होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

फिल्म के लेखकर दराब फारुकी, पायल अशर और शरीब हाशमाी ने कश्मीरी युवाओं के सामाजिक ताने-बाने के आसपास कहानी लिखी है, जो पॉजिटिव है.

विशाल मिश्रा का म्यूजिक नोटबुक का एक और प्लस पॉइंट रहा. इसके सारे गाने अच्छे थे.

इसका ‘मैं तारे’ सॉन्ग सलमान खान ने गाया है, हालांकि इसे सुनकर लगा कि इसका एक और वर्जन किसी प्रोफेशनल सिंगर का होना चाहिए था.

notebook फिल्म की एडिटिंग की अगर बात करें तो इसमें काफी कमियां थीं.

जैसा कि ऊपर बताया कि इसमें कई सीन्स को छोटा किया जा सकता था.

खैर, अगर आपको रोमांटिक फिल्में पसंद है तो नोटबुक देखने जा सकते हैं.

अच्छी एक्टिंग, सुरीले गानों और कश्मीर के खूबसूरत नजारों से सजी नोटबुक एक अच्छी फिल्म है.

लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले और इसके डायलॉग उस तरह का ड्रामा क्रिएट नही कर पाते हैं जैसी इससे उम्मीद की गई थी.

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