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Ram Janmbhoomi Babri Dispute: मोदी सरकार के नए क़दम से पक्षकार नाराज़

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Ram Janmbhoomi Babri Dispute: मोदी सरकार ने SC से की अविवादित जमीन लौटाने की मांग

नई दिल्ली:LNNमोदी सरकार ने Ram Janmbhoomi Babri Dispute पर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है।

Ram Janmbhoomi Babri Dispute पर सुप्रीम कोर्ट में पर 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई टलने के बाद

दायर अर्जी में केंद्र सरकार ने  कहा कि अयोध्या में जो गैर-विवादित जमीन है, उसे रामजन्मभूमि न्यास को दे दी जाए।

इस फैसले का वीएचपी ने स्वागत किया है।

निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि ये सिर्फ़ राजनीति है, इसके सिवा और कुछ नहीं.

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

उनका कहना था, “सुप्रीम कोर्ट से दिलवाना है तो पूरी ज़मीन निर्मोही अखाड़े को दिलाएं अखाड़ा

दूसरे पक्ष यानी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के साथ बातचीत करके मामले को सुलझा लेगा.

हम बोर्ड को अखाड़े की ज़मीन देने को तैयार हैं.

चुनाव के ठीक पहले सरकार का ये क़दम लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है और कुछ नहीं.

ये सरकार को भी पता है कि उसके इस क़दम पर सुप्रीम कोर्ट कुछ नहीं करने वाली.”

Ram Janmbhoomi Babri Dispute में सरकार के नए क़दम को विवाद से जुड़े पक्षकार तवज्जो नहीं दे रहे हैं.

सरकार के इस क़दम से उन्हें न तो विवाद सुलझने की उम्मीद दिख रही है और न ही इससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता दिख रहा है.

सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने कहा है कि Ram Janmbhoomi Babri Dispute में  गैर विवादित जमीन हिंदू पक्षकारों को दे दी जाए।

जबकि 2.77 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भारत सरकार को वापस लौटा दिया जाए।

यह भी पढ़ें: Ayodhya case: सुप्रीम कोर्ट में 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई टली

मुस्लिम पक्षकार इक़बाल हाशिम अंसारी का Ram Janmbhoomi Babri Dispute पर कहना है कि उन्हें सिर्फ़ मस्जिद की ज़मीन चाहिए.

उन्होंने कहा, “बाबरी मस्जिद के अलावा सरकार ज़मीन का कोई भी दूसरा हिस्सा लेने को आज़ाद है.

उस पर हमारा कोई दावा ही नहीं है.

उस ज़मीन को तो सरकार ने अधिग्रहित किया था, उसे वापस लेने की अर्जी डाल रखी है तो हमें क्या आपत्ति होगी.”

Ram Janmbhoomi Babri Dispute के एक अन्य पक्षकार हाजी महबूब को सरकार के इस क़दम पर ऐतराज़ है.

उनका कहना है, “अधिग्रहण के मक़सद में साफ़ कहा गया है कि जिसके पक्ष में फ़ैसला आएगा, उसे इसका हिस्सा आवंटित किया जाएगा.

ऐसे में सरकार इस ज़मीन को न्यास को देने की बात कैसे कर सकती है.”

विवादित हिस्से को छोड़ कर कहीं भी मंदिर निर्माण किया जाए तो उन्हें ऐतराज़ नहीं है.

राम जन्म भूमि मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास का कहना है

जबतक गर्भगृह की विवादित जमीन पर फैसला नहीं होता मंदिर निर्माण नहीं शुरू हो सकता.

सत्येंद्र दास का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी इजाज़त दे भी दे तो मंदिर निर्माण होना मुश्किल है

क्योंकि मंदिर गर्भगृह वाले स्थान पर बनना है.

सरकार संसद में कानून बना कर इस विवाद का हल करे और अपने वादे को निभाए.”

राम जन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने सरकार के इस क़दम की प्रशंसा की है

वेदांती इसे देर से उठाया क़दम बताते हैं

उनके मुताबिक, “यह याचिका 2014 में ही दायर की जानी चाहिए थी जब केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी थी.

ऐसा हो गया होता तो अब तक मंदिर निर्माण शुरू हो गया होता.”

अयोध्या में विवादित स्थल के आस-पास की क़रीब 67 एकड़ ज़मीन का केंद्र सरकार ने साल 1993 में अधिग्रहण कर लिया था.

बाद में कोर्ट ने इस पूरे परिसर में यथास्थिति बनाए रखने और कोई धार्मिक गतिविधि न होने के निर्देश दिए थे.

साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस ज़मीन के 2.77 एकड़ को तीन पक्षों में बराबर-बराबर बांट दिया था.

हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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