चालीस की उम्र में स्त्रियों में बढ़ता है बीमारियों का खतरा

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चालीस की उम्र में डॉक्टर से परामर्श कर जरूरी जांच कराएं

चालीस की उम्र में स्त्रियों में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

अगर आपको लग रहा है कि आप शारीरिक रूप से फिट हैं तब भी चालीस की उम्र में अपनी हेल्थ को क्रॉस चेक करें.

डॉक्टर से परामर्श कर जरूरी जांच कराएं. उसी के अनुसार अपने खानपान और फिटनेस का ध्यान रखें.

जरूरी जांच कराएं:-

*चालीस की उम्र ऐसा पड़ाव है, जब स्त्री के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं.

इस उम्र में मेनोपॉज के बाद कुछ समस्याएं हो सकती हैं.

जैसे चिड़चिड़ापन, थकान, वजन बढऩा, लगातार खाते रहने की चाहत. हालांकि यह समस्या सभी स्त्रियों में एक जैसी नहीं होती है.

* ऐसे में चालीस की उम्र में स्त्रियों को डाइट में प्रोटीन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट को शामिल करना चाहिए.

सुबह कम से कम 45 मिनट वॉक करें

नैचरल ऑयल प्रदान करने वाले मूंगफली, अखरोट और पंपकिन सीड्स लें और शुगर को पूरी तरह से न कर दें.

* वजन की समस्या को योग या फिर मिक्स्ड एक्सरसाइज के जरिये आसानी से दूर किया जा सकता है.

*इस उम्र में ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है.

यदि आपको लगे कि आपका ब्लड प्रेशर सामान्य है, तब भी नियमित रूप से इसकी जांच करानी चाहिए.

अगर आपको डायबिटीज, हृदय रोग या किडनी से संबंधित कोई समस्या है, तब यह और भी जरूरी हो जाता है.

जब स्त्रियां अपने खानपान पर ध्यान नहीं देतीं तो बीपी बढऩे की पूरी संभावना होती है.

*ओमेगा-थ्री फैटी एसिड से युक्त आहार का सेवन रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ हृदय की अनियमित गति को भी ठीक करने में मददगार होता है.

*  एक स्टडी के अनुसार सिल्वर योग ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करता है.

अगर आप किसी भी कारण योग नहींकर पा रही हैं तो सुबह कम से कम 45 मिनट वॉक करें.

वॉक करते वक्त ध्यान रखें कि पहले 10 मिनट वॉर्मअप करें…मतलब नॉर्मल गति से चलें.

इसके बाद अगले 20 मिनट तेज गति से चलें और फिर अपनी गति को मध्यम कर 10 मिनट तक चलें। रोजाना 40-45 मिनट वॉक करें.

अगर आप सुबह वॉक नहींकर पाईं तो रात को डिनर के 1 घंटे बाद वॉक करनी चाहिए.

*ब्लड प्रेशर के साथ-साथ स्त्रियों में कोलेस्ट्रॉल की भी समस्या हो जाती है.

40 या उससे अधिक उम्र की स्त्रियों को हर पांच साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करानी चाहिए.

डॉक्टर से परामर्श के अनुसार अपने खानपान और फिटनेस का ध्यान रखें

कुछ स्टडीज से यह पता चला है कि कभी-कभी एचडीएल या अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी टाइप-1 मधुमेह से पीडि़त महिलाओं के हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है।
* उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ जैसे दलिया, जौ, गेहूं ,फल और सब्जियों में फाइबर होता है.

जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है.

* हफ्ते में पांच दिन 30 से 40 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करें और अपने लिपिड प्रोफाइल को मॉनिटर करें.

*डायबिटीज अपने आप में एक गंभीर समस्या है.

अगर शुरुआती अवस्था में इसका पता चल जाता है तो इसे नियंत्रित करना आसान हो जाता है.

अगर सही समय पर इसका पता न चले तो स्त्रियों में हृदय रोग, किडनी व आंखों से संबंधित समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है.

इसलिए स्त्रियों को साल में कम से कम एक बार डायबिटीज की जांच जरूर करानी चाहिए.

* डायबिटीज में फाइबर डाइट का बड़ा महत्व होता है.

यह शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

इसलिए गेहूं, ब्राउन राइस या व्हीट ब्रेड आदि को अपनी डाइट में शामिल करें, साथ ही ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें.

उच्च प्रोटीन डाइट लें और खूब पानी पिएं.
* व्यायाम करने से शरीर में रक्तसंचार सुचारु रहता है.

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